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आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की प्रक्रिया फिर जटिल होने से CSC संचालकों में नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप—पहले सरल थी प्रक्रिया, अब छोटे-छोटे कारणों से आवेदन निरस्त होने लगे

डोंगरगढ़-राजनांदगांव जिले में आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालकों और ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा नोटरी की अनिवार्यता हटाए जाने से प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया काफी सरल हो गई थी। इससे वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोगों को राहत मिली थी तथा समय और अतिरिक्त खर्च दोनों की बचत होती थी। लेकिन अब कथित रूप से फिर से नोटरी और अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया लागू होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
CSC संचालकों का कहना है कि पहले ग्रामसभा प्रस्ताव और स्थानीय सत्यापन के आधार पर कई मामलों में प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाती थी, लेकिन अब छोटी-छोटी तकनीकी आपत्तियों के आधार पर आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि नियमों और राजपत्र की जटिल व्याख्या दिखाकर आम नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वनांचल क्षेत्रों से आने वाले लोगों को पहले ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में नोटरी शुल्क, स्टाम्प खर्च और दस्तावेज लेखन में लगने वाली अतिरिक्त राशि गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। लोगों का यह भी कहना है कि नोटरी और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े शुल्क लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे आम नागरिक परेशान हैं।
कुछ CSC संचालकों ने आरोप लगाया कि डोंगरगढ़ क्षेत्र में नियमों को जरूरत से ज्यादा कठोर तरीके से लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार जहां प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने की बात कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर स्थिति उलट दिखाई दे रही है। लोगों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा दस्तावेजों को लेकर अत्यधिक आपत्तियां लगाई जा रही हैं, जिससे आवेदन प्रक्रिया धीमी पड़ रही है।
ग्रामीणों और CSC संचालकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूर्व में लागू सरल व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाए ताकि आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने में आम लोगों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया को फिर सरल बनाया जाता है तो समय, धन और अनावश्यक भागदौड़ तीनों की बचत होगी।लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के नागरिकों को न्यूनतम दस्तावेज और कम खर्च में प्रमाण पत्र उपलब्ध हो सकें। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस बढ़ती नाराजगी और शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है तथा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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